Wednesday, July 22, 2015

"सुख" का पता "

✏ ऐ  "सुख"  तू  कहाँ   मिलता   है
क्या.  तेरा   कोई.  स्थायी.   पता.  है
✏क्यों   बन   बैठा   है.   अन्जाना
आखिर.  क्या   है   तेरा   ठिकाना।
✏कहाँ   कहाँ.    ढूंढा.  तुझको
पर.  तू  न.  कहीं  मिला  मुझको
✏ढूंढा.  ऊँचे   मकानों.  में
बड़ी  बड़ी   दुकानों.  में
स्वादिस्ट   पकवानों.  में
चोटी.  के.  धनवानों.  में
✏वो   भी   तुझको.    ढूंढ.  रहे   थे
बल्कि   मुझको.  ही   पूछ.  रहे.  थे
✏क्या   आपको   कुछ   पता    है
ये  सुख  आखिर  कहाँ  रहता   है?
✏मेरे.  पास.  तो.  "दुःख"  का   पता   था
जो   सुबह   शाम.  अक्सर.  मिलता  था
✏परेशान   होके   रपट    लिखवाई
पर   ये   कोशिश   भी   काम  न  आई
✏उम्र   अब   ढलान.   पे.   है
हौसले    थकान.   पे.    है
✏हाँ   उसकी.  तस्वीर   है   मेरे.  पास
अब.  भी.  बची   हुई.  है    आस
✏मैं.  भी.  हार    नही    मानूंगा
सुख.  के.  रहस्य   को.   जानूंगा
✏बचपन.   में    मिला    करता    था
मेरे    साथ   रहा    करता.   था
✏पर.  जबसे.   मैं    बड़ा   हो.   गया
मेरा.  सुख   मुझसे   जुदा.  हो  गया।
✏मैं   फिर   भी.  नही   हुआ    हताश
जारी   रखी    उसकी    तलाश
✏एक.  दिन.  जब   आवाज.  ये    आई
क्या.   मुझको.   ढूंढ.  रहा  है   भाई
✏मैं.  तेरे.  अन्दर   छुपा.   हुआ.    हूँ
तेरे.  ही.  घर.  में.  बसा.   हुआ.   हूँ
✏मेरा.  नही.  है   कुछ.   भी    "मोल"
सिक्कों.   में.  मुझको.   न.   तोल
✏मैं.  बच्चों.  की.   मुस्कानों.   में    हूँ
हारमोनियम   की.   तानों   में.   हूँ
✏पत्नी.  के.  साथ    चाय.   पीने.  में
"परिवार"    के.  संग.  जीने.   में
✏माँ.  बाप   के.  आशीर्वाद    में
रसोई   घर   के  पफवानो  में
✏बच्चों  की   सफलता  में   हूँ
माँ   की  निश्छल  ममता  में  हूँ
✏हर  पल  तेरे  संग    रहता  हूँ
और   अक्सर  तुझसे   कहता  हूँ
✏मैं   तो   हूँ   बस  एक    "अहसास"
बंद  कर   दे   तु  मेरी    तलाश
✏जो   मिला   उसी  में  कर   "संतोष"
आज  को  जी  ले  कल  की न सोच
✏कल  के   लिए  आज  को  न   खोना
मेरे   लिए   कभी   दुखी ना होना 🌺🌺💐💐

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